(N/A) $1908$ में,$G.H. Hardy$ और $W. Weinberg$ ने जीन आवृत्तियों के अध्ययन के लिए एक गणितीय संबंध स्थापित किया,जिसे हार्डी-वेनबर्ग सिद्धांत के रूप में जाना जाता है।
यह सिद्धांत बताता है कि एक समष्टि (population) में एलील आवृत्तियाँ स्थिर रहती हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी समान बनी रहती हैं,अर्थात जीन पूल स्थिर रहता है। इस अवस्था को आनुवंशिक संतुलन (genetic equilibrium) कहा जाता है।
गणितीय रूप से,सभी एलील आवृत्तियों का योग $1$ होता है। यदि किसी जीन के दो एलील $A$ और $a$ हैं जिनकी आवृत्तियाँ क्रमशः $p$ और $q$ हैं,तो समष्टि में व्यक्तियों की आवृत्ति को द्विपद विस्तार $(p + q)^2 = p^2 + 2pq + q^2 = 1$ द्वारा दर्शाया जाता है।
यहाँ,$p^2$ समयुग्मजी प्रभावी व्यक्तियों $(AA)$ की आवृत्ति को दर्शाता है,$q^2$ समयुग्मजी अप्रभावी व्यक्तियों $(aa)$ की आवृत्ति को दर्शाता है,और $2pq$ विषमयुग्मजी व्यक्तियों $(Aa)$ की आवृत्ति को दर्शाता है।
जब मापी गई आवृत्ति अपेक्षित मूल्यों से भिन्न होती है,तो यह अंतर विकासवादी परिवर्तन की सीमा को इंगित करता है। इस संतुलन में कोई भी व्यवधान,जैसे कि एलील आवृत्ति में परिवर्तन,को विकास (evolution) के परिणाम के रूप में व्याख्यायित किया जाता है।
हार्डी-वेनबर्ग संतुलन को प्रभावित करने वाले पाँच कारक ज्ञात हैं: जीन प्रवासन (जीन प्रवाह),आनुवंशिक विचलन (genetic drift),उत्परिवर्तन,आनुवंशिक पुनर्संयोजन और प्राकृतिक चयन।